सोमवार से अध्यापको का आमरण-अनशन का ऐलान……

छह संगठनों में राज्य अध्यापक संघ, शासकीय अध्यापक संगठन, आजाद अध्यापक संघ, अध्यापक कांग्रेस, अध्यापक संविदा शिक्षक संघ और गुरुजी संघ शामिल हैं

चुनावी साल में अध्यापकों की नाराजगी ख़त्म होने का नाम नही ले रही है  रही है| इसके चलते एक बार सरकार फिर सकते में आ गई है !ज्ञात हो की पिछले दिनों  29 मई को हुई कैबिनेट बैठक में अध्यापक संवर्ग का शिक्षा विभाग में संविलियन को लेकर लिए गए फैसले से नाराज अध्यापकों ने एक बार फिर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है| प्रदेश भर से आये अध्यापक रविवार को राजधानी में फिर एकजुट हुए हैं। संविलियन की मांग को लेकर अध्यापकों के छह संघ एकजुट हो गए हैं। वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए इन संघों ने विधानसभा घेरने और सोमवार से आमरण अनशन करने की घोषणा की है।  इन छह संगठनों में राज्य अध्यापक संघ, शासकीय अध्यापक संगठन, आजाद अध्यापक संघ, अध्यापक कांग्रेस, अध्यापक संविदा शिक्षक संघ और गुरुजी संघ शामिल हैं।

राज्य अध्यापक संघ मप्र की प्रांतीय कार्यकरणी की महत्वपूर्ण बैठक नीलम पार्क भोपाल में प्रान्त अध्यक्ष जगदीश यादव की अध्यक्षता में सम्प्पन हुई । जिसमे यह आंदोलन की रणनीति बनी| मध्य प्रदेश सरकार की वादाखिलाफी से नाराज अध्यापकों ने रविवार को विधानसभा का घेराव करने और सोमवार से आमरण-अनशन का ऐलान किया है|  राज्य अध्यापक संघ के अध्यक्ष जगदीश यादव ने बताया कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा की गई घोषणा एक विभाग एक केडर का पालन न करते हुए मंत्रिपरिषद की बैठक के बाद जारी संक्षेपिका  में अध्यापको का केडर बदल दिया गया जिससे पूरे प्रदेश के अध्यापकों में  भारी आक्रोश व्याप्त है। संक्षेपिका  के अनुसार अध्यापको का शिक्षा विभाग में संविलियन न किया जाकर नवीन पदनाम देकर  केडर बदला जा रहा है । इस केडर में आने के बाद अध्यापको की 20 वर्षों की सेवा की गणना शून्य  हो जाएगी। नया केडर 1 जुलाई 2018  से लागू किया जा रहा है।

अध्यापको ने ई एटेंडेंस का भी विरोध किया गया।  प्रांताध्यक्ष श्री यादव ने सर्व सहमति से निर्णय लेकर घोषणा की है कि अगर शासन द्वारा हमारी आपत्तियों का निराकरण नही किया जाता है तो 24 जून को भोपाल में प्रदेश भर के अध्यापक एकत्रित होकर विधानसभा का घेराव करेंगे। सकारात्मक चर्चा नही होने पर 25 जून से आमरण अनशन शुरू किया जाएगा। प्रदेश भर के लाखों अध्यापक शाहजहानी पार्क में एकत्र हुए हैं। अध्यापक महासंघ और संघर्ष समिति ने भी इस आंदोलन का समर्थन किया है। मांग हैं कि अध्यापकों का शिक्षा विभाग में संविलियन करते हुए सहायक शिक्षक, शिक्षक और व्याख्याता बनाया जाए, उन्हें सातवें वेतनमान का लाभ जनवरी 2016 से मिले, सेवा की निरंतरता मानते हुए पुरानी पेंशन, बीमा, ग्रेच्युटी का लाभ जैसी सुविधाओं को दिया जाए।

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