कान्हा के बाघ की दहाड़ उड़ीसा में सुनाई देगी …..

भारत के संरक्षण इतिहास में यह पहली बार हुआ है, जब किसी टाइगर रिजर्व से बाघ को अन्य राज्य में भेजा जा रहा है ,मप्र उड़ीसा को 3 जोड़े बाघ (6 बाघ) पुनर्स्थापन के लिये दे रहा है…

बाघ पुनर्स्थापन योजना के तहत मध्य प्रदेश की बाघों की नर्सरी कान्हा टाइगर रिजर्व से बाघों को उड़ीसा के सतकोसिया टाइगर रिजर्व में भेजा जा रहा है  अब कान्हा के बाघों से उड़ीसा के जंगल दहल जायेंगे !  वन विभाग ने कान्हा रिजर्व से बाघा पुनर्स्थापन के लिए रवाना कर दिया है। भारत के संरक्षण इतिहास में यह पहली बार हुआ है, जब किसी टाइगर रिजर्व से बाघ को किसी अन्य राज्य में पुनर्स्थापन के लिये भेजा गया है। मप्र उड़ीसा को 3 जोड़े बाघ (6 बाघ) पुनर्स्थापन के लिये दे रहा है। इसी कड़ी में कान्हा से दिये जाने वाले दो बाघों में से एक को रवाना किया गया।

कान्हा टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक डॉ. संजय कुमार शुक्ला के नेतृत्व में कान्हा एवं पेंच टाइगर रिजर्व के वन्य-प्राणी चिकित्सकों और अधिकारियों ने बाघ को बेहोश कर सभी आवश्यक ऐहतियात के साथ रवाना किया। उड़ीसा के सतकोसिया टाइगर रिजर्व में पहले कभी बाघों की अच्छी आबादी थी। इस टाइगर रिजर्व में बाघों के पुनर्स्थापन के लिये केन्द्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण, नई दिल्ली और भारतीय वन्य-जीव संस्थान, देहरादून द्वारा एक विशेष योजना तैयार की गई है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य-प्राणी शाहबाज अहमद ने कहा कि उम्मीद है कि यह बाघ इस महात्वाकांक्षी परियोजना के उद्देश्य को पूर्ण कर सतकोसिया टाइगर रिजर्व में बाघों की अच्छी संख्या स्थापित करने में मददगार होगा। बाघ को ले जाने उड़ीसा के वन अधिकारियों और वन्य-प्राणी चिकित्सकों की टीम भी कान्हा टाइगर रिजर्व आई।

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