मरने बाले किसान थे या असामाजिक तत्व ? शिवराज जवाब दे ?….

रिपोर्ट में आंदोलनकारी किसानो को किसान नहीं असामाजिक तत्व माना गया है….क्या किसान पुत्र शिवराज इससे सहमत है ?

मंदसौर में पिछले साल 6 जून को हुए गोलीकांड मामले की जांच के लिए गठित एक सदस्यीय जांच आयोग की रिपोर्ट सरकार को सौंप दी गई है| सरकार ने हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस जेके जैन की अध्यक्षता में एक सदस्यीय जांच आयोग का गठन किया था,  11 सितंबर 2017 को सरकार को यह रिपोर्ट सौंपी जानी थी, लेकिन जांच आयोग ने 9 माह की देरी से सरकार को रिपोर्ट सौंपी। जिस पर सवाल खड़े हो रहे हैं| कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने जे.के.जैन आयोग की रिपोर्ट पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है|ज्ञात हो कि 6 जून 2017 को पिपल्यामंडी में आंदोलन कर रहे 5 किसानों की पुलिस की गोली लगने से मौत हो गई थी। सरकार ने घटना के दो दिन बाद ही मंदसौर के तत्कालीन कलेक्टर स्वतंत्र कुमार सिंह और एसपी ओपी त्रिपाठी को सस्पेंड कर दिया था। तब से मामले की जांच रिपोर्ट का इन्तजार था और इसकी उम्मीद थी कि दोषियों पर कार्रवाई होगी| लेकिन अब सवाल उठ रहे हैं|

कमलनाथ का कहना है जिस तरह से आयोग का कार्यकाल बार- बार बढ़ाया गया और कार्यकाल ख़त्म होने के बाद भी रिपोर्ट जारी करने में जानबूझकर देरी की गयी, उसी से यह आशंका बलवती हो गयी थी कि शिवराज सरकार के निर्देशन में रिपोर्ट में दोषियों को बचाने का खेल , खेला जा रहा है| उन्होंने कहा जाँच रिपोर्ट गोल-माल होगी और इससे पीड़ितों को कोई न्याय नहीं मिलेगा और दोषियों को पूरी तरह से बचा लिया जायेगा और वही हुआ| कमलनाथ ने रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदेश के किसान पुत्र मुखिया ने इस गोलीकांड के बाद , शाही उपवास पर बैठकर पीड़ित किसानो के परिजनो से जो वादे किये थे , वो सब झूठे साबित हुए| शिवराज ने झूठे घड़ियाली आँसू बहाये थे , उसका सच सामने आ गया|

नाथ ने कहा पिछले 1 वर्ष से पीड़ित किसानो के परिजन जो न्याय की उम्मीद लगाये बैठकर ,आँसू बहा रहे थे , उनके ज़ख़्मों को इस रिपोर्ट ने फिर हरा कर दिया….इस रिपोर्ट से एक बार फिर शिवराज का किसान विरोधी चेहरा सामने आ गया है| …शिवराज किसानो के हितैषी होने का दावा कर ,उनके लिये जितनी भी बातें करे , उन सब को इस रिपोर्ट ने आइना दिखा दिया है|

कमलनाथ के सवाल..शिवराज से माँगा जवाब  

1. इस रिपोर्ट में आंदोलनकारी किसानो को किसान नहीं असामाजिक तत्व माना गया है….

क्या किसान पुत्र शिवराज इससे सहमत है ?

2. यदि वो किसान नहीं असामाजिक तत्व थे तो फिर मुआवज़ा राशि किसे दी गयी ,

किसान को या असामाजिक तत्व को ?

3. इस रिपोर्ट में पुलिस को पूरी तरह से क्लीनचिट देते हुए कहा गया है कि भीड़ को तितरबितर करने व आत्मरक्षा के लिये गोली चलाना न्यायसंगत व आवश्यक था …

क्या शिवराज जी इससे सहमत है ?

4. इस रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि असामाजिक तत्वों ने 7 जवानो को घेर लिया , उन पर पेट्रोल बम फेंके , मारपीट की…उसके बाद पुलिस ने गोली चलाई…जिसमें दो लोगों की मौत हुई…

अब जब रिपोर्ट में असामाजिक तत्वों के घेरने का उल्लेख है , तो गोली से किसान केसे मारे गये ?

5. रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि असामाजिक तत्वों ने पीपलियामंडी थाने में घुसकर तोड़फोड़ की…

जिस पर पुलिस ने गोली चलायी , जिसमें 3 लोगों की मौत हुई….

ये किसान थे या असामाजिक तत्व ? शिवराज जवाब दे ?

6. इस गोलीकांड के बाद प्रारंभिक दृष्ट्या दोषी पाये गये तत्कालीन एसपी व कलेक्टर को इस रिपोर्ट में सीधे दोषी नहीं माना गया है ? पुलिस व सीआरपीएफ़ को क्लीन चिट दी गयी है तो आख़िर किसानो की मौत का दोषी कौन ?

7. किसान पुत्र शिवराज बताये कि हल चलाकर अपना जीवन यापन करने वाला निरिह किसान क्या पेट्रोल बम चलाना , तोड़फोड़ , मारपीट , लूटपाट जेसा कृत्य कर सकता है..? वे इससे सहमत है ?

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