शिवराज जी अब कोई और घोटाला करने के लिए बचा है….

अब तक विभिन्न विभागों के 1500 करोड़ रुपए से ज्यादा के टेंडरों में गड़बड़ी सामने आ चुकी है,शिवराज के करीबी IAS भी शक के दायरे में ..

मध्यप्रदेश में  ई-प्रोक्योरमेंट सिस्टम में जल निगम के बाद जल संसाधन, एमपीआरडीसी और अन्य विभागों के टेंडरों में भी टेंपरिंग उजागर होने पर अब सियासत गर्मा गई है। विपक्ष लगातार सत्तापक्ष को घेरने में लगा हुआ है और राजनैतिक हमला कर रहा है। कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ के बाद पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अरुण यादव ने भी सरकार पर हमला बोला है। यादव ने मांग की है कि इस पूरे घोटाले की जांच सुप्रीमकोर्ट के रिटायर्ड जज की निगरानी में सीबीआई से होना चाहिए

दरअसल, बीते दिनों ई-प्रोक्योरमेंट सिस्टम द्वारा मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीआरडीसी) और जल संसाधन विभाग के टेंडरों में घोटाला सामने आया। जिसके बाद एमपीआरडीसी ने इन टेंडरों को निरस्त करने के साथ 450 करोड़ की 5 पैकेज वाली सड़कों के री-टेंडर जारी किए थे। इस बड़ी गड़बड़ी को देखते हुए विभाग द्वारा ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल से होने वाले दूसरे विभागों के टेंडर भी जांचे गए हैं।जिसमें ई-प्रोक्योरमेंट सिस्टम में जल निगम के बाद जल संसाधन, एमपीआरडीसी और अन्य विभागों के टेंडरों में भी टेंपरिंग उजागर हुई है। अब तक अलग-अलग विभागों के 1500 करोड़ रुपए से ज्यादा के टेंडरों में गड़बड़ी सामने आ चुकी है।वही इस घोटालों को लेकर कई शिवराज के करीबी आईएएस भी शक के दायरे में आ गए है।

लगातार गड़बड़ी को लेकर पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अरुण यादव ने शिवराज सरकार पर हमला बोला है।उन्होंने ट्वीटर के माध्यम से लिखा है कि  ई टेंडरिंग में सालों से सरकार की नाक के नीचे चल रहा था अरबों रुपये का खेल। मुख्यमंत्री के करीबी आईएएस अफसर भी जांच के घेरे में । इस पूरे घोटाले की जांच सुप्रीमकोर्ट के रिटायर्ड जज की निगरानी में सीबीआई से होना चाहिए । शिवराज जी अब कोई और घोटाला करने के लिए बचा है ? #घोटाला_प्रदेश

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