बच्चो ने जब मामा की बोलतो बंद कर दी ….

मामाजी कृपया जाति को शिक्षा में न लाएं…मामाजी….शिक्षा में जाति क्यों….

घटिया राजनीति और सत्तालोलुप्ता के चलते राजनेता समाज में जात- पात ,ऊँच नीच का जहर सींच कर सामाजिक ताने बने को बिगाड़ रहे है यह बात अब छोटे छोटे बच्चे भी समझने लगे है और जब मासूम जुबान से निकले सबालो के तीर अच्छे अच्छो को निरुत्तर कर देता है !

आज कुछ इस तरह हुआ जब आरक्षण को लेकर आज मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को असहज सवाल का सामना करना पड़ा ।समन्वय भवन में आयोजित कार्यक्रम ”हम छू लेंगे आसमान’ में मुख्यमंत्री छात्र-छात्राओं के सवालों का जवाब दे रहे थे तभी एक बच्ची महक खत्री ने सवाल उठाया ” मेरे 67 प्रतिशत अंक है और मैं जनरल कैटेगरी से हूं तो क्या मेरी फीस माफ होगी।” मुख्यमंत्री इस सवाल को सुनकर असहज हो गए। हालाकि बाद मे  मुख्यमंत्री ने महक के सवाल के जवाब में हर जिले के उत्कृष्ट विद्यालय में कैरियर काउंसलिंग की सुविधा शुरू करने की बात कही ।

पुराने भोपाल के इंपीरियल स्कूल में पढ़ने वाली महक बड़ी होकर वैज्ञानिक बनना चाहती है| इसके पहले भी मुख्यमंत्री को एक बच्चे ने OBC  वर्ग का होने के कारण 75% अंक होने पर लैपटॉप न मिलने का दर्द भरा सवाल उठाया था क्योंकि सामान्य वर्ग में 85% अंक लाने पर लैपटॉप दिए जाने की सुविधा है और अनु सूचित जाति जनजाति के बच्चों को 75% अंक लाने पर यह सुविधा मिलती है। सवाल पूछने के दौरान छात्र ने सीएम से कहा था – मामाजी, कृपया जाति को शिक्षा में न लाएं। छात्र ने उदाहरण देते हुए बताया कि उसके आरक्षित श्रेणी के एक दोस्त को तीन प्रतिशत कम अंक के बावजूद लैपटॉप मिल रहा है, आखिर क्यों। छात्र ने उत्तेजित होकर बार-बार यही शब्द दोहराया-मामाजी शिक्षा में जाति…मामाजी….शिक्षा में जाति क्यों और फिर कहा कि 80 प्रतिशत लाने पर भी क्यों नहीं उसे लैपटॉप मिल रहा।

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