आरक्षण नीति से नाखुश संविदाकर्मी …..

20 फीसदी पदों में आरक्षण वाली नीति से संविदा कर्मी बेहद नाराज हैं। संविदाकर्मीयो का कहना है कि मुख्यमंत्री ने संविदा का कलंक मिटाने की घोषणा की थी, लेकिन बीते मंगलवार को कैबिनेट में संविदा कर्मचारियों को 20 फीसदी नियमित पदों पर आरक्षण देने की नीति को मंजूरी देकर बीच में फंसा दिया। इस नीति का कर्मचारियों को फायदा नहीं होगा। इसको लेकर आंदोलन करेंगे। ये कर्मचारी नियमित करने की मांग पर अड़े हैं लेकिन सरकार तैयार नहीं है।

इधर एक सप्ताह से हड़ताल कर रहे वन कर्मचारी भी ग्रेड पे में सुधार समेत अन्य मांगों को लेकर निर्णय नहीं होने से नाराज हैं। इन्होंने बुधवार से भूख हड़ताल शुरू करने की चेतावनी दी है। मप्र संविदा अधिकारी कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष रमेश राठौर ने कहा कि जिस नीति को मंजूरी दी है। उसके तहत कर्मचारियों को परीक्षा से गुजरना होगा, जो कि पहले ही परीक्षा देकर नौकरी कर रहे हैं। 50 फीसदी संविदा कर्मियों की उम्र 40 से 45 साल हो चुकी है उन्हें कब परीक्षा लेकर नियमित किया जाएगा, यह तय नहीं है। कुल मिलाकर संविदा कर्मचारी दोबारा परीक्षा लेने के फैसले से नाराज हैं। राठौर का कहना है कि जिन पदों पर कर्मचारी कार्यरत हैं उन्हें पदों पर या उनके समकक्ष पदों पर उन्हें नियमित किया जाए।

इस नीति पर भारतीय मजदूर संघ के महामंत्री केपी सिंह, संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सौरभ चौहान ने भी आपत्ति जताई है। मप्र वन कर्मचारी संघ के निर्मल तिवारी व महामंत्री आमोद तिवारी का कहना है कि सरकार ने रेंजर, डिप्टी रेंजर, नाकेदार के ग्रेड-पे में सुधार का मामला कमेटी को देने का निर्णय लिया। जिस पर कब तक फैसला होगा यह तय नहीं है। स्थाईकर्मियों को नियमित करने कोई चर्चा नहीं की। इसका साफ मतलब है कि सरकार वन कर्मियों को अनसुना कर रही है। ऐसे में हड़ताल वापस नहीं लेंगे, बल्कि आंदोलन तेज करेंगे। बता दें कि ये कर्मचारी राजधानी स्थित 74 बंगला स्थित रेंज कार्यालय व प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर 24 मई से हड़ताल पर बैठे हैं। सरकार के फैसले से अध्यापक पूरी तरह खुश नहीं है।

आजाद अध्यापक संघ के अध्यक्ष भरत पटेल का कहना है कि नीति में सबकुछ साफ नहीं है। सरकार नए पद बनाकर अध्यापकों का शिक्षा विभाग में संविलियन करने वाली है जो ठीक नहीं होगा। उन्होंने कहा कि सरकार पुराने पदों को जीवित कर संविलियन करें या अध्यापक नामक पद ही रहने दें। यहीं मांग को लेकर मप्र शासकीय अध्यापक संघ के संयोजक उपेंद्र कौशल व अध्यक्ष आरिफ अंजुम ने वित्त मंत्री जयंत मलैया से मुलाकात कर अपनी बात रखी।

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